तुलसी की खेती की जानकारी

तुलसी की खेती एवं उसकी ओषधीय उपयोगिता | कैसे करे ? 2021

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परिचय

आयुर्वेद में तुलसी को उसके औषधीय गुणों के कारण विशेष महत्व दिया जाता है तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों के काम आती है इसका उपयोग सर्दी जुकाम, खाँसी, दन्त रोग, और श्वास सम्बन्धी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है, तुलसी पर आधारित अनेक दवाइया बाजार पर उपलब्ध है और उनकी खूब बिक्री हो रही है अतः बाजार की कमी को पूरा करने के लिए तुलसी की खेती किसानो के लिए बहुत ही फायदेमंद है |

प्राचीन काल से लेकर आज तक तथा समस्त धार्मिक ग्रन्थों में तुलसी का वर्णन मिलता है | हिन्दू धर्म के अनुसार सभी घरों में तुलसी का एक पौधा होना अनिवार्य है, तथा इसकी पूजा की जाती है | तुलसी लेमिएसी कुल का वार्षिक पौधा है | इसकी लम्बाई 30-60 से.मी. तक होती है | इसकी शखाएं काफी सघन होती है | इसकी तना एवं शाखाएँ बैगनी रंग की होती है | यह समस्त भारतवर्ष पाई जाती है | इसके समस्त भाग का अपना अलग-अलग उपयोग होता है |

तुलसी की उपयोगिता उस समय और भी बढ़ जाती है, जब वातावरण प्रदूषण की चर्चा होती है | तुलसी का पौधा वातावरण की शुद्धता को बढ़ाने में तथा आक्सीजन की मात्रा को संतुलित करने के साथ-साथ अन्य उदोगो में जैसे सौन्दर्य प्रसाधन की वस्तुओ के निर्माण में, खाद पदार्थ में तथा सुगंधित द्रव्य आदि के निर्माण में उपयोगी है |

साधारण नाम – तुलसी

व्यापारिक नाम – तुलसी

वानस्पतिक नाम – Ocimum sanctum lin

कुल – लोमिएसी

तुलसी की खेती में भूमि

तुलसी का पौधा सभी प्रकार की मृदा में अच्छी प्रकार होता है | लेकिन बलुई दोमट मिट्टी काफी अनुकूल मानी जाती है | इस प्रकार की मिट्टी में पौधों की वृद्धी अच्छी होती है, तथा साथ-साथ पौधों को उखाड़ा जाये तो जड़ को हानि नहीं होती है | यह पौधा समशीतोष्ण क्षेत्रों में आसानी से उगाई जा सकती है तथा जिसमे जीवांश की पर्याप्त मात्रा तुलसी की खेती के लिए आवश्यक है |

तुलसी की अच्छी खेती के लिए जलवायु

तुलसी का पौधा समस्त जलवायु के लिए अनुकूल होता है | परन्तु उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु काफी अच्छी मानी जाती है लम्बे समय तक उच्च तापमान यदि मिलता रहे तो पौधों की वृद्धि अच्छी होती है साथ ही साथ तेल उत्पादन अच्छा होता है |

मुख्य रूप से तुलसी की तीन प्रजातियों की खेती होती है :-

1.कृष्ण तुलसी: पौधा गहरे बैगनी रंग के तना वाला होता है | पत्तियां छोटी होती है तथा गहरे हरे रंग की होती है |

2.विष्णु तुलसी: विष्णु तुलसी को लक्ष्मी तुलसी के नाम से भी जाना जाता है पौधा हल्के हरे रंग का होता है | पत्तियां हल्की हरी रंग की होती है |

3.वीणा तुलसी: यह तुलसी की जंगली प्रजाति है |  

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तुलसी की खेती लिए खेत की तैयारी

पौधे रोपने से पूर्व 2-3 गहरी जुताई करनी चाहिए तथा अंतिम जुताई के समय सड़ी गोबर की खाद कम्पोस्ट 12-15 टन हेक्टेयर मिलाकर पाटा लगा देना चाहिए | इससे तुलसी की व्यवसायिक खेती अच्छी तरह होती है |

तुलसी की खेती कैसे करे

तुलसी की खेती में बीज दर एवं नर्सरी

बीज की मात्रा 300-320 ग्राम प्रति हेक्टेयर | इसकी नर्सरी फरवरी माह के तीसरे सप्ताह में डाली जाती है तथा पौधा रोपण का कार्य अप्रेल माह में किया जाता है | इसके बीज को 2 से.मी. गहराई तक तक ही नर्सरी में डालनाचाहिए | इनका रोपण 6 सप्ताह बाद आसानी से किया जा सकता है जब पौधा में 4-5 पत्तियां आ जाती है |

तुलसी की खेती के लिए उर्वरक की संतुलित मात्रा

पौधा रोपण से पूर्व अंतिम जुताई के समय 15 टन प्रति हेक्टेयर के दर से हरी खाद, वर्मीकम्पोस्ट या सड़ी गोबर के खाद डालनी चाहिए | इसके अतिरिक्त नाइट्रोजन, फास्फोरसएवं पोटास की पूर्ति के लिए क्रमशः 120:60:60: किलोग्राम प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए |

सिंचाई

गर्मी के मौसम में 3 सिंचाई प्रति महीने आवश्यक हो जाती हैं | वर्षा के मौसम में सिंचाई की विशेष आवश्यकता नहीं पडती हैं | लेकिन 12-15 सिंचाई पुरे साल भर में देना आवश्यक है |

तुलसी फसल की सुरक्षा

तुलसी में लीफ रोलर नामक कीट का प्रकोप होता है | उसके नियंत्रण के लिए 0.2 प्रतिशत मालाथियान का छिड़काव करना चाहिए | इसके अतिरिक्त पाउड्री मिल्ड्यू तथा पर्ण गलन रोग का प्रभाव होता है जिसके प्रबन्धन के लिए 0.1 प्रतिशत बोर्डो मीश्रन का छिड़काव करें |

तुलसी की फसल अवधी

तुलसी एक वर्षीय फसल है लेकिन तुलसी की खेती मुख्यतः दो उद्देश्यों के लिए की जाती है, सीधे पत्तों की बिक्री हेतु तठे तेल निकालने हेतु दोनों ही स्थितिओं में मुख्य खेत में पौध 90-95 दिन के हो जाए तथा इनमे लगी मंजरियाँ पूर्णतया विकसित हो जाएँ तब इन्हें काट लिया जाता है |

तुलसी की खेती में उपज

तुलसी की उपज काफी अच्छी होती है | यदि इसकी कटाई चमकीली धुप में हो तो ज्यादा अच्छी मानी जाती है तथा इसमें तेल की मात्रा बढ़ जाती है | एक औसत अनुमान के अनुसार 10000-15000 कि.ग्रा. अच्छी पत्तियों की प्राप्ति प्रति हेक्टेयर हो सकती है जिससे 15-20 तेल प्राप्त हो सकता है |

बाजार दर –तुलसी के पंचांग का वर्तमान दर 15-20 रूपये प्रति किलोग्राम होता है |

तुलसी की औषधीय उपयोगिता

तुलसी की उपयोगिता प्राचीन काल से ही आयुर्वेद जगत में विद्यमान है | इसकी पत्तियां, तना, जड़, तथा फूल सभी का महत्व है | यह अपने औषधीय गुण के कारण काफी प्रचलित है तथा इसकी औषधीय उपयोगिता काफी उच्च कोटि की मानी जाती है | इसके निम्नलिखित आवश्यक गुण धर्म है :-

  1. तुलसी की पत्तियों से निर्मित टॉनिक तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है |
  2. सामान्य बुखार आने पर तुलसी की पत्ती का काढ़ा पीने से बुखार में राहत मिलती है |
  3. मौसमी बुखार या सर्द-गर्मी में तुलसी का काढ़ा काफी लाभदायक होता है |
  4. तुलसी की पत्ती में हल्का नमक मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से श्वास की बीमारी में राहत मिलती है |
  5. प्रतिदिन तुलसी का जूस जिसमे तुलसी पत्ती तथा सहद की मात्रा को मिलाकर सेवन किया जाये तो किडनी स्टोन की समस्या समाप्त हो सकती है |
  6. तुलसी कोलेस्ट्राल भी कम करता है साथ ही साथ खून को भी साफ करने में सहायक है |
  7. तुलसी की पत्तियों को पीसकर शारीर पर लगाने से चर्म रोग में राहत मिलती है |
  8. तुलसी सामान्य कमजोरी तथा नपुसंकता के उपचार में भी उपयोगी है |
  9. तुलसी के पौधे में मुख्य घटक के रूप में फिनाल्स, एलडीहाइड्स, टेनिन्स, सेपोनिन्स तथा वसा रहती है |

इसकी औषधीय गुणों को देखते हुए तथा इसकी उपयोगिता के आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह भगवान का रूप है या भगवान के द्वारा दिया गया एक अनमोल वरदान है |


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