प्याज की खेती

{खेती की जानकरी 2021} प्याज की खेती रबी और खरीब की जानकारी उन्नत तरीका

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प्याज की उन्नत उत्पादन तकनीक

प्याज एक महत्वपूर्ण सब्जी एवं मसाला फसल है, इसमें प्रोटीन और कुछ विटामिन भी अल्प मात्रा में पाये जाते है प्याज में बहुत से औषधीय गुण भी पाए जाते है | मध्य प्रदेश में प्याज की खेती मुख्य रूप से खंडवा, भोजपुर, रतलाम, छिन्दवाड़ा एवं इंदौर तथा सामान्य रूप से हर जिले में की जाती है मध्यप्रदेश में इसकी औसत उत्पादकता 150 क्विनटल प्रति हेक्टेयर है |

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प्याज की खेती के लिए जलवायु

इसके लिए गर्म एवं नम जलवायु उपयुक्त रहती है, मध्यप्रदेश में अधिकतर प्याज रबी के मौसम में लगाई जाती है, लेकिन अब खरीफ के मौसम में भी प्याज लगाकर अधिक लाभ कमाया जा सकता है बीजो के अंकुरण हेतु 20-25 सेंटीग्रेट तापमान उचित रहता है, परन्तु कंद विकास के लिए अधिक तापमान एवं बड़े दिनों की आवश्यकता होती है |

प्याज की खेती हेतु उन्नत कृषि यंत्र एवं प्रौद्योगिकी

हम सभी जानते है की सब्जी जैसी फसलों के उत्पादन में अधिक श्रम तथा पैसा खर्च करना पड़ता है, परन्तु उन्नत प्रौद्योगिकी की मदद से खेत की तैयारी, पौध की तयारीएवं सिंचाई तथा खरपतवार नियंत्रण जैसे खर्चीले कृषि कार्यो में उन्नत कृषि यंत्र तथा प्रौद्योगिकी हमारी बहुत मददगार हो सकती है |

प्याज की खेती की तैयारी में रोटावेटर का उपयोग

यह यंत्र अत्यंत उपयोगी है, पूर्व फसल अवशेषो को मिट्टी में मिलाकर ढेला रहित खेत तैयार करने में यह यंत्र बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है इस तरह तैयार खेत में सब्जी की अच्छी बढ़वार एवं पैदावार मिलती है |

प्याज खुदाई यंत्र

ट्रेक्टर चलित प्याज खुदाई यंत्र बहुत उपयोगी है | लगभग 0.4 हेक्टेयर प्रति घंटा की रफ़्तार से यह मशीन प्याज खुदाई कर सकती है जो श्रमिको द्वारा खुदाई से अच्छा है तथा ज्यादा रिकवरी भी होती है | प्याज की खेती के लिए जीवांशयुक्त उपजाऊ मिट्टी दोमट या बलुई दोमट भूमि जिसका pH मान 5.8-6.8 के मध्य सर्वोत्तम होता है भूमि में जल निकास का उन्चित प्रबंध होना चाहिए |

बड फार्मर द्वारा क्यारियों का निर्माण

प्याज की पौध चूँकि ऊँची क्यारियों में तैयार की जाती है जिन्हें बनाने में किसान को अतिरिक्त श्रम तथा पैसा लगता है बंड फार्मर की सहायता से यह क्यारियां कम समय में एवं कम खर्चे से बनाई जा सकती है |

प्याज की पौधा संरक्षण

प्याज की खेती में उन्नत निंदाई-गुड़ाई यंत्रो का प्रयोग

प्याज की खेती में निंदाई एवं गुड़ाई का कार्य श्रम साध्य एवं खर्चीला है, उन्नत एक या दो पहिया तथा ग्राबर जैसे मानव हस्त चालित यंत्रो की मदद से इन कार्यो को सरलता एवं कम लागत में किया जा सकता है | यह यंत्र निंदाई के साथ साथ गुड़ाई का भी कार्य करते है, जिसमे पौधों को मिटटी चढ़ाने के अलावा यह यंत्र खेत की नमी को भी रोकने में मदद करते है तथा प्याज का उत्पादन बढ़ाने में सहयोगी होते है जिनका उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए |

प्याज की खेती में उन्नत सिंचाई का उपयोग

जल के किफायती उपयोग एवं सब्जी उत्पादन में जल प्रबंधन को लेकर उन्नत उपलब्ध तकनिकी के प्रयोग को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए, प्याज के उत्पादन में टपक सिंचाई तकनिकी का उपयोग लाभकारी रहा है | 25-40 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर, डिजाईन एवं आवश्यकतानुसार के बीच खर्च इस सिंचाई प्रणाली में आता है |

ड्रिप सिंचाई के उपयोग से हम सिंचाई हेतु लगने वाले पानी की मात्रा को 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक कम कर सकते है, जो आज के समय की अहम् आवाश्यक है, ड्रिप सिंचाई प्रणाली की सिंचाई लाइनों में 2, 4, या 8 लीटर/घंटे की दर से सिंचाई करने वाले A मीटर युक्त सिस्टम को उपयुक्त एवं सही पाया गया है जिसे उपयोग कर पानी की उपयोगिता एवं श्रम तथा लागत को कम कर लाभ कमाया जा सकता है, टपक सिंचाई हेतु राज्य सरकार द्वारा प्राप्त अनुदान का लाभ लेकर किसान लाभान्वित हो सकते है |

प्याज का पौध तैयार करना

उचित जल निकास तथा ऊँची उठी हुई क्यारियां पौध तैयार करने के लिए आवश्यक होती है क्यारियों की लम्बाई तीन मीटर एवं चौड़ाई के मीटर एवं ऊंचाई 15 सेमी. रखनी चाहिए, क्यारियों में उपचारित बीज को 8-10 सेमी. की दुरी पर लाइन बनाकर 1 से 1.5 सेमी. की गहराई पर बोते है |

बुवाई के बाद बीज को कम्पोस्ट खाद एवं मिट्टी का बारीक मिश्रण बनाकर ढक देते है, क्यारियों को हलके घास से ढक देते है तथा बीज उगने तक प्रतिदिन फुवारे से हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए | बीज उगने के बाद घास को हटा देना चाहिए और आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहते है | 6-8 सप्ताह बाद पौधे लगाने हेतु तैयार हो जाते है |

एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 8 से 10 किलो बीज की आवश्यकता होती है सीधे बुवाई के लिए 20-25 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है |

मध्यप्रदेश के लिए अनुमोदित किस्मे प्याज की खेती के लिए

किस्म का नामअवधी दिनों में रोपण उपरांतउपज क्षमता क्विंटल/हेक्टेयरअन्य विवरण
अग्रिफ़ौंड डार्करेड95-110375-400खरीफ ऋतू हेतु उपयुक्त
अग्रीफाउंड लाइट रेड160-165300-325रबी मौसम हेतु
अर्का आल्याण100-110470-500खरीफ मौसम हेतु
अर्का निकेतन140-145420-450रबी मौसम हेतु
अर्का प्रगति140-145300-350रबी व खरीफ मौसम हेतु
एन-1,2,4140-145250-300रबी मौसम हेतु
एन-53135-140250-300खरीफ मौसम हेतु
पंजाब सिलेक्शन125-130300-325रबी मौसम हेतु
पूसा रत्नार120-125325-350रबी मौसम हेतु
पूसा रेड125-140250-300रबी मौसम हेतु भण्डारण क्षमता अच्छी

रोपाई का समय एवं तरीका

प्याज की खेती तीनो ऋतुओं में की जाती है खरीफ फसल की रोपाई अगस्त के पहले एवं दुसरे सप्ताह में की जाती है, रबी फसल की रोपाई नवम्बर तथा जायद फसल की रोपाई जनवरी के अंतिम सप्ताह से फ़रवरी के द्वितीय सप्ताह तक की जाती है | पौधों की रोपाई तैयार खेत में कतार से कतार 15 सेमी एवं पौधे से पौध 10 सेमी की दुरी पर करते है |

प्याज की खेती के लिए खाद एवं उर्वरक

प्याज की फसल को अधिक मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है अतः 20-25 टन गोबर या कम्पोस्ट खाद के साथ भूमि की उर्वरा शक्ति के अनुसार नाइट्रोजन 80-100 किलोग्राम, सल्फर 50-60 किलोग्राम एवं पोटाश 80 से 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर देना चाहिए |

कम्पोस्ट खाद को खेत की पहली जुताई के समय भूमि में मिला दे | नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा एवं सल्फर तथा पोटाश की पूरी मात्रा को आधार खाद के रूप में रोपाई से पहले देना चाहिए | नाइट्रोजन की शेष मात्रा को बराबर दो भागो में बाँटकर रोपाई के 30 से 40 दिन एवं 65 से 70 दिनों बाद फसल में छिड़काव कर देना चाहिए |

प्याज की खेती के लिए सिंचाई

प्याज की जड़े भूमि में 8-10 सेमी. की गहराई तक ही सिमित रहती है अतः सिंचाई हल्की परन्तु जल्दी-जल्दी देनी पड़ती है रबी एवं जायद की फसलों में सिंचाई 7 से 13 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए | प्याज में कंद बनते तथा वृद्धि के समय पानी की कमी नहीं होनी चाहिए | यह अवस्था रोपाई के 60 से 110 दिन चलती है | कंदों के पूर्ण पकने से 15 से 20 दिन पहले सिंचाई बंद करने से कंदों का रंग आकर्षक एवं भण्डारण क्षमता बढ़ जाती है |

प्याज की निराई-गुड़ाई एवं खरपतवार नियंत्रण

फसल को खरपतवार मुक्त रखने के लिए 3-4 निराई-गुड़ाई की आवश्यकता होती है | निदाई की संख्या कम करने के लिए रासयनिक खाद खरपतवार नियंत्रण हेतु फ्लूक्लोरालिन (बसालीन 48 ई.सी.) 1.2 कि.मी. सक्रीय तत्व या पेंडीमेथिलिन (स्टाम्प 30 ई.सी.) 0.75 कि.मी. सक्रीय तत्व प्रति हेक्टर पूर्व छिड़काव करना चाहिए |

प्याज की पौधा संरक्षण

प्याज में बैगनी धब्बा रोग

रोग की प्रारम्भिक अवस्था में पत्तियों तथा उर्ध्वस्तम्भ पर अन्दर की तरफ सफ़ेद बैगनी रंग के चकते बन जाते है | जो बाद में बड़े बैगनी धब्बो में बदल जाते है रोग संक्रमण के स्थान पर पत्ती एवं तना कमजोर होकर गिर जाते है | इस बीमारी का प्रकोप फरवरी-अप्रेल के महीने में अधिक होता है |

प्याज में झुलसा रोग

रोग प्रकोप की स्थिति में पत्तियों का शीर्ष भाग झुलस जाता है एवं भूरी धारियां बन जाती है |

प्याज में रोकथाम

बैगनी धब्बा एवं झुलसा रोग के नियंत्रण हेतु मैन्कोजेब 0.25 प्रतिशत या कार्बोडिंजिम 0.05 प्रतिशत दवा के घोल का 15 दिन अंतर से आवश्यकतानुसार दो से तीन छिड़काव करना चाहिए |

प्याज की फसल में थ्रिप्स

प्याज की फसल का थ्रिप्स सबसे अधिक हानिकारक कीट है | यह पत्तियों का रस चूसता है फलस्वरूप पत्तियां चित्तकबरी हो जाती है | पत्तियों के शीर्ष भूरे होकर मुरझाने लगते हैं और सुख जाते है |

रोकथाम

इस कीट से नियंत्रण हेतु मोनोक्रोटोफास 0.05 प्रतिशत या फस्फामिडान 0.05 प्रतिशत या मेंथाइल डेमेटान 0.05 प्रतिशत दवा का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए |

प्याज की खुदाई एवं उपज

प्याज की खुदाई एवं उपज

ऋतू के अनुसार प्याज की फसल तीन से चार महीने में पक जाती है | जब 25 से 50 प्रतिशत पत्तियां पीली पड़कर मुरझाने लगे तब कंदों की खुदाई की उपयुक्त अवस्था रहती है प्याज की औसत उपज 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है |

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