Poly house farming | पॉली हाउस कृषि उपयोग हेतु 2021 | new and gain more.

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कृषि में ग्रीन हाउस का उपयोग सर्वविदित है, जिसमे कम से कम आंशिक रूप से नियंत्रित वातावरण में फसलें उगाई जाती है | ग्रीनहाउस में तापमान एवं नमी नियंत्रित करने के लिए उपकरण लगाये जाते हैं जो कि हमारे ग्रामीण परिवेश में लघु एवं सीमांत किसानों के लिए खर्चीला होता है | इसे अधिक सत्ता एवं उपयोगी बनाने के लिए पूर्वी क्षेत्र के लिए भा.कृ.अनु.प. का अनुसंधान परिसर, पटना में पॉली हाउस का निर्माण ( Making of poly house ) का किया जाता है |

पॉली हाउस पारदर्शी पालीथीन एवं लोहे की छड़ से बना ढाँचा है जिसके अंदर का तापमान बाहार के वातावरण से 5-7 सेंटी ग्रेट अधिक होता है | इसका उपयोग, ग्रीष्मकालीन सब्जियों की पौधशाला (नर्सरी) उगाने हेतु किया जा सकता है ताकि बाजार से सब्जियों की उपलब्धता मौसमी सब्जियों की तुलना में 20-35 दिन पहले हो सके | एक पॉली हाउस (5 मी. X 2.5 मी. X 1.6 मी.) के निर्माण में लगभग 3500/- रुपये लागत आती है | Per Poly House Cost is Rs 3500/-

Poly house Technic, पॉली हाउस का निर्माण
Poly house Technic

दो प्रकार की पाली हाउस की आकृति ज्यादा प्रचलित है – पहला आयताकार एवं दूसरा डोम आकार का डोम आकार वाली पॉली हाउस में पौधों को सूर्य का प्रकाश अधिक मात्रा में मिलता है, इसलिए डोम टाईप फोल्डिंग पॉली हाउस बनाने की विधि यहाँ वर्णित है |

डोम आकार वाली पॉली हाउस बनाने की विधि ( Dome Size Poly House )

डोम टाइप पॉली हाउस बनाने के लिए सबसे पहले एम.एस. एंगिल सेक्शन से फिक्चर तैयार करते हैं | जिसके लिए 35 x 35 x 5 एम.एम. का 15.4 फीट लम्बा एंगिल सेक्शन देते हैं इसे अर्धचन्द्राकार में मोड़कर फिक्चर तैयार किया जाता है | ध्यान रहे इसके मोड़ते समय एक किनारा ऊपर और दूसरा किनारा ऊपर की ओर रहे |

5 मीटर लम्बा, 2.5 मीटर चौड़ा और 1.6 मीटर ऊँचा डोम टाइप पॉली हाउस बनाने के लिए 22 गेज मोटा एम.एम. पाईप जिसका व्यास 3/4 इंच पारदर्शी पाली थीन (100 माइक्रान कैंची मोटा या अधिक) दो सूत (8 एम.एम.) मोटा और डेढ़ इंच लम्बे नट वोल्ट, मशीन स्क्रू 3/2 वेल्क्रो (चरचरी) और फेविकोल (एस.आर. 998) की आवश्यकता होती है |सबसे पहले आधार फ्रेम बनाने के लिए एम.एस. की 5 मीटर और 2.5 मीटर के 2-2 पीस हैण्डहैकसा पे काट लेना चाहिए |

फिर कॉर्नर को लोहे की पत्तीको एल आकार में काटकर नट वोल्ट से फीट करते है | एम.एस. पाइप के 15 फीट लम्बे 6 पीस हेण्ड हैक्सा से काटकर उनके फिक्चर पर चढ़ाकर पहले हाथ से धीरे-धीरे दबा-दबा कर हाथ से मोड़ते हैं फिर लकड़ी के हथौड़े से मार-मारकर अर्धचन्द्राकार शक्ल में बदल देते हैं यदि कोई कमी रह जाता है तो लकड़ी काटकर उसपर रखकर पाइप को उचित अर्धचन्द्राकार में लकड़ी के हथौड़े की मदद से बनाते हैं |

इसी प्रकार सभी 6 पाइपों को मोड़ते हैं |पाईप मोड़ने के बाद इसके दोनों सिरों पर 2 x 3/4 आकार की छिद्र की हुई लोहे की पट्टियाँ गैस बेल्डिंग से जोड़ते हैं जो आधार क्रम से नट वोल्ट द्वारा फीट किया जाता है |

मुड़े हुए अर्धचन्द्राकार पाईप को 6 बराबर इस्सों में बांटकर 2 सूत का मुड़े पाईप में छिद्र बनाते हैं | आगे और पीछे लगाने वाले अर्धचन्द्राकार पाईप को दरवाजा और खाली स्थान को पाईपों से ही पाली थीन के जरिये आवश्यकतानुसार बनाया जाता है |

पॉली हाउस की लम्बाई चौड़ाई Lenght of the Poly house

poly house
poly house

एम.एस. पाईप के एक मीटर लम्बे 25 पीस काटते हैं जिसके एक सिरे पर बेल्ट और दुसरे सिरे पर नट गैस वेल्डिंग द्वारा जोड़ते हैं जो बाद में अर्धचन्द्राकार पाईपों के बीच में चित्रानुसार फीट किए जाते हैं | इससे पॉलीहाउस मजबूत होता है और पालीथीन को सहारा मिलता है | 100 माइक्रोन या इससे अधिक मोटी 16.4 x 16.4 फीट पारदर्शी पालीथीन उपयोग में लाते हैं जिससे प्रकाश इसके अन्दर आसानी से जा सके |

यदि पालीथीन एक पीस में उपलब्ध हो तो स्प्रिटलैम्प की मदद से बीच में जोड़ देकर आवश्यकतानुसार आकार में तैयार कर ली जाती है | आगे और पीछे पालीथीन लगाने के लिए अर्धचन्द्राकार में काटते हैं जिसके लिए 3 मी. x 2 मी. के दो पीस काटते है फिर अर्धचन्द्राकार फ्रेम को रखकर 1 अतिरिक्त गोलाई में लेकर काट लेते हैं जो कि जोड़ने के समय दबाने के लिए आवश्यक होता है |

ध्यान रहे नीचे की तरफ पालीथीन 3 इंच या इससे अधिक लेते हैं जो कि बाद में पाईप पर लपेटकर मशीन स्क्रू से फिर करने के लिए जरूरी है | पॉलीहाउस का ढाँचा तैयार होने के बाद इस पर आयरन आक्साइड (मेटल प्रायमर) करना जरुरी होता है इससे जंग नहीं लगता | मेटल प्रायमर के बाद आवश्यक रंग का इनेमल पेन्ट करते हैं जिससे पॉलीहाउस की आयु बढ़ जाती है और देखने में सुंदर भी लगता है |

पालीथीन तैयार करना Making of polythin

तैयार पालीथीन को तैयार फ्रेम पर चढ़ाकर मशीन स्क्रू से चारों तरफ से फ्रेम पर 6 एम.एन. का छिड़काव करके (आवश्यकता अनुसार छिद्र) पालीथीन को कसा जाता है | अन्त में दरवाजे के ऊपर आयी पालीथीन को कैंची से काटकर दरवाजे का निकास बनाये जाता है | फिर दरवाजे के किनारे से 3 अतिरिक्त लम्बे पालीथीन लेकर दरवाजे का कवर बनाते हैं |

3 पालीथीन से बने दरवाजे के कवर के किनारे 6 की दूरी पर बेलक्रो (चरचरी) 3 लम्बे मेन भाग को फेविकोल (SR-998) चिपकाते हैं | इसी प्रकार वेलक्रो (चरचरी) के फिमेल भाग के 3 लम्बे टुकड़े पाईप से बने दरवाजे के किनारे पर चढ़ी पालीथीन पर चिपकाते हैं ध्यान रहे वेलक्रो को चिपकाने से पहले पालीथीन की चिकनी सतह को सैण्ड पेपर या खुरदुरी चीज से रगड़ लें तब बेलक्रो अच्छी तरह फेविकोल की मदद से पालीथीन से चिपकती है |

पूसा पॉली हाउस एम.एस. पाईप और नट वोल्टों की मदद से तैयार किया जाता है और पालीथीन को मशीन स्क्रू के मुख्य फ्रेम से कसा जाता है | इस तरह का पॉली हाउस कही भी जाकर फीट किया जा सकता है और जब इसकी आवश्यकता न हो तो खोलकर रखा भी जा सकता है | इसके नट वोल्टों को तेल से चिकनाई कर दिया जाए तो इस तरह पॉली हाउस को अच्छे रख-रखाव में पाँच वर्ष तक उपयोग में लाया जा सकता है |  

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