मोती की खेती moti ki kheti

Moti ki kheti hindi | मोती की खेती कैसे करे ? आइये जानते है

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परिचय – मोती की खेती (Moti ki Kheti)

भारत में मोती की खेती (Moti ki kheti) मुख्यतः दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के ततुतीकेरन तथा बिहार के दरभंगा जिले से प्राप्त होते है, वर्तमान समय में सबसे अधिक मोती चीन तथा जापान में उत्पन्न होते है फारस की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले मोती को ही बसरे का मोती कहा जाता है जिसे सर्वोत्तम माना गया है |

मोती एक प्राकृतिक रत्न है जो सिप से पैदा होता है, भारत समेत हर देश में मोतियों की मांग बढ़ती जा रही है, लेकिन दोहन और प्रदुषण से इनकी संख्या घटती जा रही है | अपनी घरेलु मांग को पूरा करने के लिए भारत अन्तराष्ट्रीय बाजार से हर साल मोतियों की बड़ी मात्रा में आयात करता है |पहले मोती केवल समुद्र से ही प्राप्त होते थे बाद में इन्हें क्रित्रिम रूप से झील, तालाब, नदी आदि में मोती की खेती करके भी बनाया जाने लगा है, मोती फारस की खाड़ी, श्रीलंका, वेनेजुएला, मेक्सिको, ऑस्ट्रलिया तथा बंगाल की खाड़ी में पाए जाते है |

आजकल मोती कई रंगों में मिलते है जैसे- श्वेत, श्याम, गुलाबी व पीत वर्ण तथ श्याम वर्ण के मोतिओ को ताहिती कहते है ये काले रंग की मोती महिलाओं के गले में काफी सुन्दर दीखते है ऑस्ट्रेलिया के हलके पीत वर्ण के मोती दुर्लभ होते है, इन्हें साउथ-पी पर्ल के नाम से जाना जाता है अकोया नामक मोती साधारण होते है |

मोती कैसे बनता है ? Moti kaise banta hai ?

घोंघा नाम का एक जीव जिसे मालस्क कहते है, अपने शारीर से निकलने वाले एक चिकने तरल पदार्थ द्वारा अपने घर का निर्माण करता है, घोंघे के घर को सीपी कहते है इसके अन्दर वह अपने शत्रुयों  से भी सुरक्षित रहता है, घोंघो की हजारो किस्मे है और उनके शैल भी विभिन्न रंग के जैसे गुलाबी, लाल, पीले, नारंगी भूरे तथा अन्य और भी रंगों के होते है तथा ये अति आकर्षक भी होते हैं |

घोंघों की मोती बनाने वाली किस्म बाइवाल्वज कहलाती है इसमें से भी ओएस्टर घोंघा सर्वाधिक मोती बनता है | मोती बनना भी एक मजेदार प्रक्रिया है | वायु, जल व भोजन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए कभी-कभी जब घोंघे अपने सेल के द्वारा खोलते हैं तो कुछ विजतियाँ पदार्थ जैसे रेत कण कीड़े-मकोड़ें आदि उस खुले मुह में प्रवेश कर जाते हैं | घोंघा अपनी त्वचा से निकलने वाले चिकने तरल पदार्थ द्वारा उस विजातीय पदार्थ पर परतें चढ़ाने लगते है |

हमारे देश में विशाल समुद्री तटों के साथ ढेरों नदियाँ, झरने और तलाब मौजूद है | इनमे मछली पालन के अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है |

मोती की खेती कैसे करते है ? how to do Moti ki kheti

मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम शरद ऋतू यानि अक्टूबर से दिसम्बर तक का समय उचित माना जाता है | कम से कम 10 गुणा 10 फीट या बड़े आकार के तालाब में मोतियों की खेती की जा सकती है | मोती संवर्धन के लिए 0.4 हेक्टेयर जैसे छोटे तालाब में अधिकतम 25000 सीप से मोती उत्पादन किया जा सकता है | खेती शुरू करने के लिए किसानों को पहले तालाब, नदीं आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है या फिर इन्हें खरीदा भी जा सकता है |

इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर 4 से 6 मिलीलीटर व्यास वाले साधारण या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध,पुष्प आकृति आदि डाले जाते है | फिर सीप को बंद किया जाता है | इन सीपों को नायलॉन बैग में 10 दिनों तक एन्टी-बायोटिक और प्राकृतिक चारे पर रखा जाता है | रोजाना इनका निरिक्षण किया जाता है, और मृत सीपों को हटा लिया जाता है | अब इन सीपों को तालाबों में डाल दिया जाता है |

इसके लिए इन्हें नायलॉन बेगो में रखकर (दो सीप प्रति बैग) बाँस या पीवीसी की पाइप से लटका दिया जाता है और तालाब में एक मीटर की गहराई पर छोड़ दिया जाता है | प्रति हेक्टेयर 20 हजार से 30 हजार सीप की दर से इनका पालन किया जा सकता है | अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिंक के चारो ओर जमने लगता है जो अंत में मोती का रूप लेता है | लगभग 8 से 10 माह बाद सीप को चीर कर मोती निकाल लिया जाता है |

कम लागत में ज्यादा मुनाफा Moti ki kheti me

एक सीप लगभग 20 से 30 रूपए की आती है बाजार में एक मिमी से 20 मिमी सीप के मोती का दाम करीब 300 से लेकर 1500 रुपए होता है | आजकल डिजाइनर मोतियों को खासा पसन्द किया जा रहा है जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है | भारतीय बाजार की अपेक्षा विदेशी बाजार में मोतियों का निर्यात कर काफी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है | तथा सीप से मोती निकाल लेने के बाद सीप को भी बाजार में बेंचा जा सकता है |

सीप द्वारा कई सजावटी समान तैयार किये जते है | सीलिंग झूमर, आर्कषक झालर, गुलदस्ते आदि वाही वर्तमान समय में सीपों से कन्नौज में इत्र का तेल निकालने का काम बड़े पैमाने में किया जाता है | जिससे सीप को भी स्थनीय बाजार में तत्काल बेचा जा सकता है |

सीपों से नंदी और तालाबों के जल का भी शुद्धिकरण भी होते रहता है जिससे जल प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है | सुखा अकाल की मार झेल रहे किसानों एवं बेरोजगार छात्र-छत्राओ को मीठे पानी में मोती संवर्धन के क्षेत्र में आगे आना चाहिए क्योंकि मोतियों की मांग देश विदेश में बनी रहने के कारण मोती की खेती का भविष्य उज्ज्वल प्रतीत होता है |

भारत के अनेक राज्यों के नवयुवकों ने मोती उत्पादन को एक पेशे के रूप में अपनाया गया है | उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखण्ड एवं छत्तीसगढ़ राज्य में भी मोती उत्पादन की बेहतर संभवना है | मोती संवर्धन से अधिक जानकारी के लिए बमोरिया मोती संवर्धन केंद्र, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश से सम्पर्क किया जा सकता है | यह संस्थान ग्रामीण नवयुवकों किसानों एवं छात्र-छात्राओं को मोती उत्पादन पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करता है |    


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