मक्का की खेती कैसे करे

मक्का की खेती |पूरी जानकारी|कैसे करे?

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मक्का की खेती (परिचय)

मक्का की खेती का सही समय खरीफ ऋतू की फसल है लेकिन जहा सिंचाई के साधन हो वह रबी और खरीफ के में मक्के की खेती की जा सकती है इसमें कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा पाई जाती है मक्का एक बहु उपयोगी फसल है मनुष्यों के साथ ही ये पशुओ के आहार का एक अच्छा श्रोत हो अगर आद्योगिक क्षेत्र में मक्के की खेती की बात करे तो उसका और भी महत्व होता है इससे अनेक तरह के उत्पाद भी तैयार किये जाते है जो हमारे लिए काफी उपयोगी होते है किसान भाई इसकी खेती करके अच्छी खासी मुनाफा कम सकते है |

किसान भाई मक्का की खेती जैविक तरीके से कर सकते है जिसमे लागत कम और पैदावार अधिक होती है लगभग ६५% मक्का का उपयोग मुर्गी और पशुआहार के रूप में किया जाता है इसके साथ ही मक्के से पौष्टिक चारा भी प्राप्त किया जाता है भुट्टे काटने के बाद बचे हुए कडवी पत्तियों को चारे के रूप में खिलाई जाती अन्य फसलो की तुलना में मक्का कम समय में पकने वाली और अधिक पैदावार देने वाली फसल है अगर किसान भाई आज की तकनीक के अनुसार खेती करे तो इस फसल की अधिक पैदावार से अच्छा मुनाफा ले सकते है |

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इसमें सबसे जरुरी बात खेती के लिए चुनी गयी जगह की जलवायु उसके अनुकूल होनी चाहिए और उचित जल निकास वाली भूमि जिसका PH मान सामान्य हो |

मक्का की खेती  जलवायु

  1. मक्का उष्ण और आद्र जलवायु की फसल होती है
  2. इसके लिए ऐसी भूमि जहाँ पानी का निकास अच्छा हो उपयुक्त होता है
  3. मक्का की फसल के लिए बुवाई के समय १८-३० डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है |

 मक्का की खेती में खेत की तैयारी कैसे करे?

खेत की तैयारी लिए खेत में पानी लगाने के बाद हैरो से जुताई करके पाटा लगा देना चाहिए आखिरी जुताई के समय गोबर की सड़ी हुई खाद को खेत में मिला देना चाहिए रबी के मौसम में कल्टीवेटर से दो बार जुताई करने के बाद दो बार हैरो करना लाभदायक है |

हर किसान अपनी बोई गयी फसल से अच्छा मुनाफा कमाना चाहता है ऐसा तभी संभव हो सकता है जब किसान भाई बोवाई से पहले खेत को अच्छे तैयार करने के बाद उन किस्मो का ही उपयोग करे जो रोग प्रतिरोधक क्षमता रखती हो साथ ही बेहतर उपज देने वाली होनी चाहिए उन्नत किस्मो के चयन के बाद बीजो को मृदा जनिक रोगो और किट से बचने के लिए बोवाई से पहले बीज उपचार करना बहुत जरुरी होता है |

 मक्का की खेती में उन्नत किस्मे

नविन , श्वेता , कंचन, शक्ति १, आजाद, उत्तम, नवज्योति, प्रभात, और गौरव

संकर किस्मे

गंगा 1, गंगा ४, के एच 510, DHM-15 पूसा अर्ली १ और हिम -१२९

पशु चारा किस्मे

जे-1006, प्रताप चरी ६ और अफ्रीकन टाल

बोवाई और बीज उपचार कैसे करे?

खरीफ के लिए जून के अंत तक और रबी के मौसम में फ़रवरी के आखिर तक फसल की बोवाई कर लेनी चाहिए सामान्य मक्का के लिए 18-20 किलोग्राम और संकर किस्म के लिए 12-15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज का उपयोग करना चाहिए मक्का की बुवाई हल से 3-5 cm गहराई पर करे, लाइन से लाइन की दुरी 55-65 cm रखे और पौधे से पौधे की दुरी 25-30 सेमी तक रखनी चाहिए बीज का उपचार बोवाई से पहले करना जरुरी होता है जिसके लिए एक किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम थिरम से उपचारित करना चाहिए |

क्या आप जानते है की जो पोषक तत्व हम पौधों को उपलब्ध कराते है वो मात्रा पौधों के लिए सही है? ऐसा सोचना बिलकुल ही गकत होगा क्युकी भूमि में पहले से ही कई पोषक तत्व उपलब्ध होते है खेत में किन पोषक तत्वों की कमी है हमे इसकी जानकारी नही होती इसके अलावा खेतो में हम अपने मन मुताबिक खाद और उर्वरको का प्रयोग करते है जिससे हमारी फसल को नुकसान तो होता ही है साथ ही साथ भूमि की उर्वरा सकती भी कम होती है इसलिए हमे खेत में खाद या उर्वरा देने से पहले खेती की जांच जरुर करवा लेनी चाहिए |

मक्का की खेती

मक्का की खेती में खाद और उर्वरक

  • फसल के लिए आखिरी जुताई के समय और फसल बुवाई के एक से दो सप्ताह पहले प्रति हेक्टेयर 20-25 टन सड़ी हुई गोबर खाद को खेत में मिला देना चाहिए |
  • मक्के की अच्छी पैदावार के लिए 150-180 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60-70 किलोग्राम फास्फोरस, 60-70 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर देना उपयुक्त होता है |
  • इसमें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई से पहले देनी चाहिए और आधी मात्रा फसल बुवाई के 30-45 दिन बाद देनी चाहिए |

मक्का की खेती में सिंचाई कैसे करे?

मक्के में सिचाई की जरुरत मौसम पर निर्भर करती है पहली सिचाई पर हमें बहुत ध्यान देने की जरुरत होती है, अगर खेत में अधिक पानी भरा हो तो छोटे पौधों की बढ़वार रुक जाती है पहली सिंचाई में पानी मेढ़ो के ऊपर नही बहना चाहिए मुख्य रूप से फुल आने और दाना भराव के समय सिंचाई करना कभी लाभदायक होता है |

मक्का की खेती में खरपतवार को कैसे रोके?

मुख्य रूप फसल के जमा होने के बाद सबसे पहले खरपतवार की समस्या आती है जिसके नियत्रण के लिए प्रथम निकाई गुनाई का कार्य 20-25 दिन की प्रथम अवस्था पर करे इसके उपरांत दूसरी निकाई-गुडाई 40-45 दिनों की फसल अवस्था पर करे इसके बाद कोई निकाई गुड़ाई की कोई आवश्यकता नहीं होती |

पोषक तत्व प्रबंधन

जिसके अनतर्गत नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा बचाकर समस्त उर्वरको का उपयोग बेसल ग्रुप में किया जाता है शेष नाइट्रोजन को दो बराबर भागो मे बाटकर प्रथम टॉप ड्रेसिंग 20-25 दिन की अवस्था पर और दूसरी टॉप ड्रेसिंग नर्मंजारी अवस्था पर करनी चाहिए |

जो किसान भाई धान खेत में कटाई के उपरांत मक्का की बोवाई टेप्लिंगविधि द्वारा करते है उनके खेत में उर्वरक प्रयोग करने की प्रक्रिया इस प्रकार है |

गन्ने की भरपूर पैदावार हेतु 120-१५० किलोग्राम नाइट्रोजन, ७५किलोग्रम फास्फोरस, ५०किलोग्राम पोटाश जिसको डाईअमोनियम फास्फेट एवं म्यूरेट ऑफ़ पोटाश की माध्यम से फसल की 20-25 दिनों की अवस्था में पौधों की जढ़ क्षेत्रो में टॉप ड्रेसिंग के रूप में प्रयोग करना चाहिए |

मक्का की खेती में किट का नियंत्रण

पौधों को अनेक प्रकार की किटें जैसे दीमक, बालदार किट, तना भेधक किट देखने को मिलती है जिसे नियंत्रण करने के लिए क्लोरोपाईरीफास को 2 लीटर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सिंचाई के नाली के माध्यम से खेत में प्रयोग करना चाहिए |

बालदार किट के नियत्रण हेतु डाइक्लोरोवाश 650ML प्रति हेक्टेयर 800 लीटर की पानी मिलाकर स्प्रे कर सकते है तना बेधक की किटो की अवस्था में डेल्टामेथिन 1ML प्रति लीटर पानी के हिसाब से मिला लेना चाहिए |

इसके साथ-साथ मक्के की फसल में पर्ण झुलसा, डंठल विगलन बहुत ही देखने को मिलता है जिसमे पर्ण झुलसा के रोकथाम हेतु मैन्कोजेब दवा 2ML प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर चिढ़काव कर सकते है एवं आवश्यकता अनुसार 15 दिनों के अन्दर चिढ़काव करते रहना चाहिए डंठल विगलन के प्रबंधन हेतु जल निकास की उचित व्यवस्था रखनी चाहिए तीव्र प्रकोप की स्थिति में कापर आक्सी क्लोराइड 500ML और स्ट्रेपटोसाइक्लीन की 15ML ग्राम मात्रा का घोल बनाकर प्रति एकड़ की दर से छिडकाव करना चाहिए |


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