मधुमक्खी पालन कैसे करे

{नयी जानकारी} मधुमक्खी पालन कैसे होता है? पूरी जानकारी

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मधुमक्खी पालन परिचय

मधुमक्खी पालन मानव की सर्वश्रेष्ट मित्र है | मधुमक्खियों की सेवाएं अद्धितीय और अनुपम है | मधुमक्खियाँ परागण के द्वारा फसलों की पैदावार बढ़ाती है | मधुमक्खी का डंक गठिये की बीमारी तथा दूसरी कई बीमारियों में लाभ पहुँचाती है | मधूमक्खिओं से मिलने वाला मोम बहुत से औद्योगिक कारखानों में इस्तेमाल होता है | मधुमक्खियाँ मानव के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है, जिसका वर्णन इस प्रकार है :–

मधु

मधु पृथ्वी पर मिलने वाली सब वस्तुओं में अति श्रेष्ट और अमश्त माना गया है | मधु एक पौष्टिक और लाभदायक भोजन है | हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है जिसमे हमारे देश में मधुमक्खियों के काम आने वाले फूलवाले पौधों की कमी नहीं होती है | अगर सही ढंग से इस धंधे का विकास किया जाए तो अपने देश में करोड़ों रूपये की वार्षिक वृधि की जा सकती है | मधु उत्पादन द्वारा राष्ट्रीय सम्पदा में वृद्धि तो होती है साथ ही साथ देशवाशियों को स्वास्थ्यप्रद भोजन भी मिलता है |

मोम

मधुमक्खियों से मिलने वाला दूसरा अत्यन्त आवश्यक व मूल्यवान पदार्थ मोम है | कई उद्यगों में इसका प्रयोग किया जाता है, मधुमक्खियों द्वारा इसका उत्पादन अपनी आवश्यकता पूर्ति के लिए किया जाता है परन्तु इसका उत्पादन व्यापक पैमाने पर भी किया जा सकता है |

राज अवलेह

यह बहुत ही उपयोगी पदार्थ है जिसे छ: दिन से 12 दिन उम्र की मधुमक्खियाँ अपने सिर की ग्रन्थियों से पैदा करती हैं और रानी बनने वाले शिशुओं को दिया जाता है | इसके खाने से रानी बनने वाले शिशुओं का वजन दूसरे शिशुओं से कई गुणा बढ़ जाता है | मानव शरीर में भी इसका प्रयोग पाया गया है | विदेशों में यह मनुष्य के आम आहार के रूप में प्रयोग किया जाता है |

पराग

यह मधुमक्खियों का प्रधान भोजन है | इससे उनको प्रोटीन की आवश्यकता पुरी होती है | यह नवजात शिशुओं से लेकर बड़ी मधुमक्खियाँ बनने तक सम्पूर्ण भोजन का काम करती है | यह मानव जाति के लिए भी अधिक लाभदायक सिद्ध हुआ है |

वैज्ञानिकों ने खोज की है कि पराग व शहद का मिश्रण या अकेले पराग का इस्तेमाल करने से लम्बी आयु होती है और जल्दी बुढ़ापा नहीं आता है | मानव जीवन में कुछ खनिज, कुछ किण्वक और कुछ अम्ल तत्वों की जरूरत होती है और पराग का इस्तेमाल करने से इन सब तत्वों की पूर्ति हो जाती है |

मधुमक्खियों का डंक

मधुमक्खियों के पास डंक होता है जो उसकी विष ग्रन्थि के साथ जुड़ा रहता है | जब मधुमक्खी डंक मारती है तो यह विष ग्रन्थि से उत्पन्न होने वाला विष शरीर में प्रविष्ट होता है | जिससे मानव को कष्ट होता है | लेकिन यह किसी भी प्रकार का हानि नहीं पहुँचाता | इस डंक के विष से गठियों व अन्य कई बीमारियों का उपचार होता है | विदेशों में इस विष को जमा करके इसके इंजेक्शन बनने लगे हैं जो बाजार में उपलब्ध है |

कृषि उत्पादन में वृद्धि

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कृषि उत्पादन में मधुमक्खियों की बहुत ज्यादा सहयोग होता है | परागण करके मधुमक्खियाँ फसलों की उपज बढ़ाती हैं | अच्छी किस्म के फल और बीज पैदा होते हैं | अनुमान लगाया गया है कि अगर शहद और मोम की प्राप्ति से एक रुपया मिलता है तो परागण से 20 से अधिक रुपयों का लाभ होता है | इतना ही नहीं परागण से मधुमक्खियाँ कई जंगली पौधों की जातियों को भी अपना परिवार चलाने में मदद लेती है | इससे वातावरण को शुद्ध बनाये रखने में मदद मिलती है |

मधुमक्खी पालन से लोगो को रोजगार मिलता है | जिन लोगो के पास अधिक भूमि नहीं होती, वे भी बिना किसी परेशानी के मधुमक्खी पालन कर सकते हैं | कोई भी व्यक्ति, बच्चा, बूढ़ा, नौजवान, महिला इस रोजगार को अपना सकता है क्योंकि इसकी जानकारी सरल है, लागत कम है, एवं आमदनी शीघ्र मिलने लगती है |

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मधुमक्खी पालन में मौन पालन कब और कैसे शुरू करें?

साधारणतया मधुमक्खी पालन कभी भी शुरू कर सकते है लेकिन अक्टूबर-नवम्बर फरवरी-मार्च में शुरू करने पर अधिक सफलता मिलती है | इस अवधि में मौसम अनुकूल होने से मधुमक्खियों को भोजन इक्कठा करने में आसानी होती है, तथा भोजन (पुष्परस एवं पराग) भी अधिक उपलब्ध होते हैं | अधिक भोजन उपलब्ध होने पर मधुमक्खियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है |

शत्रु तथा रोग का आक्रमण इस समय कम होता है | आने वाले समय में अगर भोजन की कमी होती है तो इस अवधि का एकत्र किया हुआ भोजन काम में आता है और मौनों की संख्या में कमी नहीं हो पाती है तथा विषम परिस्थिति को बर्दाश करने की क्षमता रखती है | अत: जब नये परिवार से शुरू करते है तो पहले मौसम में पहला शहद एवं मोम का निष्कासन नहीं करना चाहिए |

मधुमक्खी पालन की शुरुआत हमेशा 3-5 परिवार से ही करना चाहिए ताकि मधुमक्खीपालक को धीरे-धीरे इनके स्वभाव, आवश्यकता एवं प्रबन्धन की व्यवहारिक जानकारी हो सके | नये मौन समुदाय को स्थापित करते समय प्रत्येक मौन पेटिका में 5 फ्रेम मौन खरीदना चाहिए क्योंकि इनकी बिक्री फ्रेम पर ही होती है | चूँकि रानी मधुमक्खी लगभग दो हजार अंडा प्रतिदिन देती है अत: मौनों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है |21 दिनों के बाद प्रतिदिन लगभग दो हजार मधुमक्खी की संख्या बढ़ने लगती है |

मधुमक्खी पालन कैसे करे

मौन परिवार खरीदते समय रानी पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए | रानी नयी एवं गर्भित होनी चाहिए | जिसमे अंडा देने की क्षमता अधिक रहे | नयी एवं गर्भित रानी का उदर भाग चमकता हुआ होना चाहिए | बिना गर्भित रानी का उदर भाग भूरा एवं चमकहीन होता है | खरीदे हुए फ्रेम के छत्ते में अंडे, ब्रूड, पराग तथा मधुकोष्ट पुरी तरह होनी चाहिए | प्रौढ़ों की संख्या में नर्स यानि कम आयु की मधुमक्खी भी होनी चाहिए | परिवार में अधिक संख्या में ड्राँन कोष्ट नहीं होना चाहिए क्योंकि ड्राँन, श्रमिक मौनों से 7-8 गुणा अधिक मधु खाते हैं तथा परिवार में रानी के साथ मैथुन के सिवा कुछ नहीं करते है |

मधुमक्खी पालन के लिए मौनालय का प्रबंध

आदर्श मौनालय में मधुमक्खी परिवार यथासम्भव एक समान होना चाहिए अन्यथा मजबूत परिवार, कमजोर परिवार के साथ लूटमार कर सकती है | रानी मधुमक्खी को प्रतिवर्ष बदल देने से परिवार की वृद्धि अधिक होती है | फराने छत्ते को जो काला हो गया है, उसको गलाकर नया छता बना लेना चाहिए, क्योंकि फराने छत्तों पर मधुमक्खी कम काम करती है एवं मधु की गुणवत्ता में कमी आती है |

मजबूत परिवार में रानी बनने देना चाहिए क्योंकि कमजोर परिवार की रानी कमजोर होती है | परिवार को बंटवारा करते समय नयी गर्भित रानी दे देने से परिवार की बढ़ोतरी बनी रहती है | मधु-काल के पूर्व एवं मौसम खराब होने पर कृत्रिम भोजन देना चाहिए | भोजनाभाव काल में अतिरिक्त छत्ते को निकालकर भंडारित कर देना चाहिए |

जाड़े के मौसम में मौनवंश का निरिक्षण दोपहर में एवं गर्मी में सुबह-शाम करना चाहिए | मधुस्त्राव में मौनवंश का निरिक्षण एक सप्ताह पर एवं भोजनाभाव काल में 15 दिनों पर करना चाहिए | वर्षा के समय निरिक्षण नहीं करना चाहिए |

एक आदर्श मौनालय एक मौनवंश का निरिक्षण रजिस्ट्री होना चाहिए | निरिक्षण करते समय चौखटों की संख्या, शिशु पालन (प्रति वर्ग से.मी.), भोजन (प्रति वर्ग से.मी.) रोग आदि कार्य का विवरण तालिका में अंकित करना चाहिए | इससे अगले निरिक्षण के समय मौन वंश के विकास तथा उपचार की प्रभाव की जानकारी मिलती है |


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