genda fool ki jankari

{विशेष जानकारी} गेंदा फूल की खेती वैज्ञानिक खेती कैसे करें? 2020-21

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गेंदा फूल की खेती से लाभ | हजारा गेंदा फूल की खेती | गेंदा फूल की जानकारी

गेंदा फूल की खेती – परिचय

गेंदा फूल की खेती व्यवसायिक रूप से केरोटीन पिगमेंट प्राप्त करने के लिए भी की जाती है | इसका उपयोग विभिन्न खाद्य पदार्थो में पीले रंग के लिए किया जाता है | इसके फूल से प्राप्त तेल का इत्र तथा अन्य सौन्दर्य प्रसाधन बनाने में किया जाता है | फूल व्यवसाय में इसका विशिष्ट स्थान है | गेंदा एक औषधीय गुण वाला पौधा है |

हमारे देश में गेंदा सबसे प्रमुख व्यवसायिक फूलों में से एक है | इसका उपयोग माला, लरी, गजरा इत्यादी के रूप में किया जाता है | साथ ही भगवान एवं देवी देंवताओं की पूजा अर्चना में भी इसका प्रयोग किया जाता है | इसके अलावा बुके बनाने, फूलदान सजाने तथा पुष्प सज्जा के रूप भी इसका उपयोग किया जाता है |

गेंदा फूल में औषधीय गुण

  1. ताजे फूलों का रस खूनी बवासीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है |
  2. फोड़ा तथा खुजली दिनाय में इसकी हरी पत्ती का रस रस लगाने से फायदा होता है |
  3. अपरस की बीमारी में हरी पत्ती का रस लगाने से लाभ होता है |
  4. छोटा-मोटा कटने पर पत्तियों को मसलकर लगाने से खून का बहना बंद हो जाता है |
  5. गेंदा की हरी पत्ती का रस को कान में डालने से कान दर्द ठीक हो जाता है |
  6. गेंदा के हरी पत्ती के रस से मोच या अन्दरूनी चोट में मालिस करने से लाभ होता है |
  7. फूलों के अर्क निकालकर सेवन करने से खून शुद्ध होता है |  

गेंदा फूल की खेती में जलवायु

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गेंदा फूल की प्रजातियाँ काफी सहिष्णु होते है | यह शीतोष्ण कटिबंधीय जलवायु में सालो भी क्रमपूर्वक लगातार लगाया जा सकता है | सभी प्रजातियों को खुली धूपदार जगहों में लगाना पसन्द करती है | इसलिए पौधों को रोपने का उपयुक्त समय सितम्बर-अक्टूबर है | इस समय रोपने से उपज ज्यादा प्राप्त होती है |

भूमि की तैयारी

गेंदा की व्यवसायिक रूप से खेती करने के लिए खेत की तीन चार जुताई आवश्यक है | जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना देना चाहिए | खरपतवार चुन कर खेत को साफ सुथरा कर देना चाहिए | तथा सुविधा अनुसार उचित आकार का क्यारियाँ बना दें |

गेंदा फूल की खेती के लिए मिट्टी

गेंदा की खेती सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है | अधिक लाभ के लिए अच्छी उर्वर, गहरी बलुई, दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है | मिट्टी में जल निकाशी की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए | पानी लगने से पौधे की बढ़त तथा फूलों की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है | गेंदा फूल की खेती के लिए 7-7.5 पी.एच. वाली बलुई मिट्टी अच्छी मानी गई है | 8.5-10.5 पी.एच. वाली नमकीन खारी मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है |

गेंदा फूल की खेती

प्रवर्धन / प्रसारण

गेंदा का प्रसारण बीज एवं कटिंग दोनों विधि से होती है | गेंदे फूल की खेती दो तरीकों से किया जाता है |

  1. बीज द्वारा
  2. कटिंग द्वारा

बीज द्वारा गेंदा की खेती में प्रवर्धन

एक हेक्टेयर खेती के लिए लगभग 300-400 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है | बिचड़ा तैयार करने हेतु 500 वर्ग फीट जमीन की आवश्यकता होती है | जमीन की अच्छी तरह से जुताई कर दें | बीज को जमीन पर समान रूप से बिखेर दें | उसके बाद सिंचाई कर दें | इसके बाद पुआल से ढक दें 5-10 दिन में बीज का अंकुरण नजर आने पर पुआल हटा देना उचित होगा | जब बिचड़ा 20-25 दिन का हो जाए तथा उसमे 3-4 पत्तियाँ नजर आने लगे तो सावधानी पूर्वक उखाड़कर खेतो में लगाया जा सकता है | 1000 वर्गफीट में बीज दर उगाने हेतु खाद की आवश्यकता | कम्पोस्ट 50 किलोग्राम, यूरिया 5 किलोग्राम, सिंगल सुपर फास्फेट 10 किलोग्राम,नीम खली 5 किलोग्राम |

कटिंग द्वारा गेंदा की खेती में प्रवर्धन

इसके लिए स्वस्थ एवं अच्छे गुण वाले मातृ पौध का चुनाव कर लें तथा उनकी शाखाओं की अग्रभाग जिसकी लम्बाई 3-4” हो तथा लगभग 4-5 गिरट हो, को काट कर कटिंग लगायें | कटिंग को सेराडिक्स, रूटाडिक्स, या अन्य उपयुक्त हारमोन्स से उपचारित कर लगाने से जड़े जल्द, स्वस्थ एवं ज्यादा संख्या में निकलती है | एक हेक्टेयर के लिए करीब 40000 कटिंग की आवश्यकता होती है |

गेंदा फूल की प्रजातियाँ

मुख्यतः गेंदा फूल की दो प्रजातियाँ हैं |

अफ़्रीकी मेरी गोल्ड – इसके पौधे एवं फूल दोनों बड़े आकार के होते हैं |

फ़्रांसीसी गेंदा – इसके पौधे एवं फूल दोनों अपेक्षाकृत छोटे आकार के होते हैं | इसमें शाखाएं नहीं होते है किन्तु इसमें इतने अधिक पुष्प आते हैं | कि पूरा का पूरा पौधा ही पुष्पों से ढंक जाता है | इस प्रजाति के कुछ उन्नत किस्मों में रेड ब्रोकेट, कपिड मेलो, बोलरो, बटन स्कोच इत्यादि है |

गेंदा फूल की खेती में लगने वाले खाद एवं उर्वरक

अच्छी उपज हेतु खेत की तैयारी से पहले 200 किलो कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर की दर से मिट्टी में मिला दें | तत्पश्चात 120-160 किलो नाइट्रोजन 60-80 किलो फास्फोरस एवं 60-80 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग प्रति हेक्टेयर की दर से करें | नाइट्रोजन की आधी मात्रा एवं फास्फोरस और पोटाश की पुरी मात्रा खेत की अंतिम जुताई के समय मिट्टी में मिला दें, नाइट्रोजन की आधी शेष मात्रा पौधा रोपण के 30-40 दिन के अंदर प्रयोग करें |

गेंदा फूल की रोपाई

गेंदा फूल खरीफ, रबी, जायद तीनों सीजन के बाजार की मांग के अनुसार उगाया जाता है | लेकिन इसके लगाने का उपयुक्त समय सितम्बर-अक्टूबर है विभिन्न मौसम में इसकी दूरी अलग-अलग होती है जो निम्न है |

1 खरीफ (जून से जुलाई) – 60 X 45 से.मी.

2 रबी (सितम्बर से अक्टूबर) – 45 X 45 से.मी.

3 जामद (फरवरी से मार्च) – 45 X 30 से.मी.

गेंदा फूल की खेती में लगने वाले खाद एवं उर्वरक

गेंदा फूल की खेती में सिंचाई

मौसम के अनुसार 5-10 दिनों के अन्तराल पर गेंदा में सिंचाई करनी चाहिए |

(क) फरवरी माह में रोपे गए पौधे – मार्च से जून तक सप्ताह में दो बार |

(ख) जुलाई माह में रोपे गए पौधे – आवश्यकता अनुसार |

(ग) नवम्बर माह में रोपे गए पौधे – दिसम्बर से मार्च तक माह में एक बार एवं मार्च से जून तक सप्ताह में दो बार |

सिंचाई के लिए पानी का इस्तेमाल आम बात है, लेकिन बेहतर यही होता है कि पानी के साथ ताजा गोबर मिलाया जाए | गोबर मिले पानी से सिंचाई करना व्यवसायिक उत्पादन के नजरिये से बढ़िया है | ऐसे पानी का इस्तेमाल दो दिनों के अंतर में करना चाहिए | पौधे में कलियाँ लगने के दौरान सिंचाई में खास सावधानी बरतने की जरूरत पड़ती है |

गेंदा फूल की खेती में पिंचिंग

रोपाई के 30-35 दिनों के अंदर पौधे की मुख्य शाकीय कली (उपरी शीर्ष) को तोड़ देना चाहिए इससे शाखाएं ज्यादा निकलती है एवं फूल भी अधिक संख्या में प्राप्त होते हैं |

खरपतवार नियंत्रण

15-20 दिनों के अंतराल पर आवश्यकतानुसार निदाई-गुड़ाई करनी चाहिए | इससे भूमि में हवा का संचार ठीक ढंक से होता है एवं वांछित खरपतवार नष्ट हो जाते हैं |

कीट व्याधि

रेड स्पाइडर, माईट, लीफ हापर, इसे काफी नुकसान पहुँचाते हैं तथा उसके रोकथाम के लिए मैलाथियान 0.1 प्रतिशत का डाइकोफॉल 0.3 प्रतिशत का छिड़काव करें |

गेंदा फूल की खेती में रोग नियंत्रण

गेंदा में मौजैक, फूटराट, चूर्णी फफूंद मुख्य रूप से लगता है | मौजैक वाले पौधे को उखाड़कर मिट्टी तले दबा दें एवं गेंदा में कीटनाशक दवा का छिड़काव करें जिससे मौजैक की विषाणु स्थानान्तरितकरने वाले कीट का निमंत्रण हो एवं इसका विस्तार दूसरे पौधे में न हो | चूर्णी फफूंद के नियंत्रण हेतु 0.2 प्रतिशत गंधक का छिड़काव करें, एवं फूटराट के नियंत्रण हेतु इण्डोफिल एम-45 0.25 प्रतिशत का 2-3 बार छिड़काव करें |

गेंदा फूल की उत्पादन

गेंदा का उत्पादन उसकी किस्म पर निर्भर करता है | इसके साथ ही मौसम भी उत्पादन मायने रखता है | अफरीकन किस्म का गेंदा प्रति हेक्टेयर 15-16 टन और हाइब्रिड किस्म का लाल गेंदा प्रति हेक्टेयर 10-12 टन होता है | सर्दी के मौसम में गेंदा का प्रति हेक्टेयर 16 टन, बारिश के मौसम में 20-22 टन और गर्मी के दिनों में 10-12 टन होता है |

गेंदा फूल की तोड़ाई

रोपाई के 60 से 70 दिन पर गेंदा में फूल आता है जो 90-100 दिनों तक आता रहता है | फूल को तोड़ने में खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है, जिस दिन फूल तोड़ना हो उस के पहले दिन शाम को पौधे की सिंचाई करने के बाद अगले दिन सुबह फूल तोड़ लेना चाहिए | फूल तोड़ने का काम हाथो से खींच कर नहीं करना चाहिए | इससे फूलों को नुकसान होता है | इसके लिए कैंची का इस्तेमाल करना चाहिए | फूल को तोड़ने के बाद उसे छाया में रखना चाहिए | फूल को थोड़ा डंठल के तोड़ना श्रेयस्कर होता है |

गेंदा फूलों की पैकिंग

फूल का कार्टून जिसमे चारो तरफ एवं नीचे में अखबार फैलाकर रखना चाहिए एवं ऊपर से फिर अखबार से ढक कर कार्टून बंद करना चाहिए |

गेंदा की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर खर्च आमदनी

प्रति हेक्टेयर खर्च – रु.50,000.00

प्रति हेक्टेयर आमदनी – रु.90,000.00

प्रति हेक्टेयर शुद्ध लाभ रु. 40,000.00

नीम की पत्तियों से कीटनाशी बनाना

नीम की पत्तियों से एक बाल्टी को भरा जाता है | बाल्टी को पानी से भरकर चार दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है | पांचवें दिन पत्तियों को अच्छी तरह से मिलाकर छान लिया जाता है | उसके बाद, छिड़काव करने से पिल्लू, भृंग, फनना, दीमक को नियंत्रित किया जा सकता है |

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