(नये तरीका से) hindi गन्ने की खेती | कैसे करें | पूरी जानकारी

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गन्ने की खेती का सामान्य परिचय

बसंत मौसम में गन्ने की बोवाई 15 फ़रवरी से लेकर मार्च तक रहता है जिसको देखते हुए कृषि विभाग ने गन्ने की बोवाई जरी करने की सलाह दे दी है किसान उन्नत प्रजाति के गन्ने की बोवाई कर सके इसको लेकर गन्ना संघ उत्तरप्रदेश ने गन्ना खेती कैलंडर और उन्नत प्रजातियाँ जारी की है |

तो देश के गन्ना किसान वैज्ञानिक ढंग से गन्ने की खेती करके अधिक उत्पादन प्राप्त कर सके इसके लिए विकसित प्रजाति की बोवाई करे देश प्रदेश में गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए गन्ना शोध संसथान ने अभी तक 126 प्रजातियों को विकसित कर चुके है जिसमे से कई प्रजातियों के पैदावार बहुत ज्यादा है और उसकी लगत भी कम आती है गन्ने के साथ राजमा और लता वाली सब्जियों का बोवाई करके किसान अधिक लाभ भी कमा सकते है उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र गन्ने की बोवाई के लिए विभाग के तरफ से कई प्रजातियों को स्वीकृत किया है |

गन्ने की खेती के लिए उन्नत प्रजातियाँ

कोशा – 1,2,3,4,5 कोशा-87263 कोशा–87268 कोशा-0232 कोशा-01421

जल्दी पकने वाली प्रजातियाँ

कोशा-8436, कोशा-88230, कोशा-95255, कोशा-96268, कोशा-03234 यूपी-05125, कोशा-98231 कोशा-08272

देर से पकने वाली प्रजातियाँ

कोशा-767 कोशा-8432, कोशा-97264, कोशा-96275 और कोशा-12232

किसान गन्ने की अधिक पैदावार के लिए ट्रेंच विधि से गन्ने की बोवाई कर सकते है इसमें परम्परागत विधि की तुलना में डेढ़ गुना ज्यादा जमाव होता है साथी ही 46% से 50 % पानी की बचत होती है व्यावसायिक फसलो में गन्ने का महत्वपूर्ण स्थान है

गन्ने के लिए खेती की तैयारी कैसे करे

गन्ने का खेत
गन्ने की खेत

1.खेती की गहरी जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करे

2. इसके बाद देशी हल या कल्टीवेटर से जुताई करके पाटा चलाकर समतल कर लेते है

गन्ने की खेती में बीज की बोवाई कैसे करे

1.गन्ने को बसंत के मौसम में फ़रवरी से अप्रैल तक बोया जाता है

2.गन्ने की बोवाई मुख्य रूप से समतल और नाली विधि से की जाती है

3.समतल विधि में हल से 90 सेमी की दुरी पर कुंड बनाये

4.कुंडो में गन्ने के छोटे छोटे टुकडो का प्रयोग करे जिसमे दो आंखे होना जरुरी है

5.बोवाई सिरे से सिरा मिलाकर की जाती है

6.नाली विधि में 90 सेमी की दुरी पर 45 सेमी चौड़ी नाली बना ली जाती है

7.नाली में बीज को सिरे से सिरा मिलाकर बोवाई की जाती है और बीज को मिटटी से दबा देते है

ganne ki kheti
गन्ने का उत्पाद

अगर किसान भाई वैज्ञानिक तरीके से खेती कर अधिक पैदावार देने वाली प्रजाति के गन्ने की बोवाई करे तो एक एकड़ खेत में 1.5 लाख रूपये का गन्ना पैदा कर सकते है इसपर 25 हजार रूपये प्रति एकड़ की लागत आएगी एक एकड़ खेत में खाद बीज दवाए और पानी कुल मिलकर लगभग 25 हजार रूपये खर्च आएगा

यदि किसान इस विधि से गन्ने की बोवाई करते है तो लगभग एक एकड़ खेत में 500 क्विंटल गन्ना पैदा किया जा सकता है यदि गन्ने का मूल्य 275 से 30 तो एक एकड़ खेत में 1.5 लाख का गन्ना हो सकता है |

देश के 28 राज्यों में प्रमुख रूप से गन्ने की खेती होती थी लेकिन गन्ने की खेती लगभग तीन सालो से लगातार कम हो रही है साल 2014 में गन्ने का कुल रकबा 15231 हजार हेक्टेयर था जो साल 2015 में घटकर 4307 हजार हेक्टेयर ही रह गया वही साल 2016 में 5284 हजार हेक्टेयर रह गया था ऐसे में गन्ने की उपज को बढ़ाने के लिए गन्ने को विकल्प के रूप में देखा जा रहा है |

बीज की मात्र और उपचार कैसे करे

गन्ने का फसल
गाना का फसल

1. शीघ्र पकने वाली किस्मो के लिए 70-75 क्विंटल बीज प्रति हेक्टेयर की जरुरत होती है

2.देर से पकने वाले किस्मो के लिए 60-65 क्विंटल बीज प्रति हेक्टेयरकी जरुरत होती है

3.35-40 हजार तक गन्ने के टुकड़े से बीज बनाये जा सकते है

4.गन्ने के टुकडो को 10 मिनट तक बविस्टन 100 ग्राम और मेलाथियान 300ML को 100 लीटर पानी में घोल बनाकर उपचारित करे |

खाद और उर्वरक का प्रयोग कैसे करे

1.सामान्य तौर पर बोवाई से पहले खेत में 25-30 टन सड़ी गोबर की खाद मिला देना चाहिए

2..इसके अलावा 250 से 300 किलोग्राम नाइट्रोजन 80 से 90 किलोग्राम फास्फोरस और 50 से 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर प्रयोग करे

3. नाइट्रोजन को तीन बराबर भागो में बुवाई के 30 दिन, 90 दिन , और 120 दिन बाद खेत में डाले और फसल पर मिटटी चढ़ाए

4.जस्ते की कमी होने पर बुवाई के साथ 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर अवश्य डाले

गन्ने की खेती में सिंचाई कैसे करे

गन्ने फसल को अधिक पानी की आवश्यकता होती है फसल जमाव, कल्ले निकलने और बढ़वार के समय भूमि में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है खेत को छोटी छोटी क्यारियों में बांटकर सिंचाई करनी चाहिए |

खरपतवार की रोकथाम कैसे करे

खरपतवार गन्ने की फसल की दुश्मन है जो गन्ने की उपज को 40 फीसदी तक कम कर देती है औसतन एक एकड़ में 80 क्विंटल उपज हटा देते है खरपतवार ऐसे पौधे है जो खेत में बिना बोये निकल आते है और लाभ के बजाय हानि पहुचाते है इसमें खेती में प्रयोग होने वाले कृषि यंत्रो को नुकसान पहुचता है इसमें डुग मोथा हिरंधुरी तिनपतिया नील आदि सामिल है |

खरपतवार नियंत्रण किस प्रकार करे

  1. 2 किलोग्राम सोडियम साल्ट या इथाईल इस्तर 38% 1.2-1.4 किलोग्राम सक्रीय तत्व का प्रयोग करे

2. सभी उर्वरक को प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के 30-40 दिन बाद प्रयोग करे

3. एट्राजीन 2 किलोग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में मिलकर गन्ने के जमाव से पहले छिडकाव करे|

गन्ने की खेती
गन्ने की खेती

गन्ने की मोटाई और लम्बाई कैसे बढ़ाए

एक एकड़ खेत में एक कट्टा उरिया खाद डाले उसके बाद उसमे 200-250 एमएल पानी मिला ले क्योकि अगर हम इस यूरिया खाद में कोई भी अन्य दवाई मिलाते है तो यूरिया खाद के सूखे दाने होने की वजह से सारी दवाईयां उड़कर निचे चली जाती है जिससे वह अच्छे से काम नही कर पाते इसीलिए हम इसमें थोडा पानी मिला लेते है जिससे इसके दाने थोड़े चिपचिपे हो जाते है जिससे अगर हम कोई भी दवाई या उर्वरक डालते है तो इसके दाने से अछे से चिपक जाते है |

और हमे फसल में काफी अच्छे से उपयोग कर पाते है यूरिया खाद में आपको बयोविटा मिला लेना चाहिए इसमें काफी पोषक तत्व होते है आपको इसे एक एकड़ के लिए ५किलोग्राम ले लेना है इसमें बहुत ही ज्यादा माइक्रो न्यूट्रीशन है जो गन्ने की लम्बाई और मोटाई बढ़ाने में काफी सक्षम है अगर आप बयोविता की जगह इफ्फको की सगारिता लेना चाहते है तो वो भी ले सकते है उसका भी रिजल्ट आपको अच्छे से देखने को मिलेगा हलाकि वो थोड़ी महँगी है इसके साथ आप फिप्रोनिल जिसे आप रिजेट के नाम से भी जानते है इसे आप प्रति एकड़ के हिसाब से ५किलो डाल सकते है यह गन्ने के बढ़वार के साथ साथ कीटनाशी का भी काम करता है |

गन्ने की खेती का विडियो

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