चन्दन की खेती

(New) चन्दन की खेती कैसे करे ? एक बार लगाये और जीवन भर आपको आमदनी मिलती रहेगी |

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चन्दन की खेती का सामान्य परिचय

इस प्रकार यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि चन्दन की खेती के लिए मेजबान वृक्ष की आवश्यकता होती है विभिन्न पौधे इसकी तेल सामग्री की गुणवत्ता में सुधार करते है पिछले अध्ययन के बाद वर्तमान में चंदन के पौधों का विकास किया जा रहा है इससे भारत के स्थानीय आय प्रभावित होगी और आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी इसलिए, इसमें सुधार के लिए रणनीति विकसित करना आवश्यक है जिससे स्थानीय राजस्व में चंदन के योगदान की वापसी होगी | संरक्षण और विकास के माध्यम से चंदन की उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है |

चंदर एक तरह का अर्ध परजीवी पौधा यह पौधा है पोषक तत्वों को प्राप्त करने के लिए हस्टोरिया के माध्यम से अन्य पौधों के साथ जुड़ा हुआ है कुछ तत्व हैं कैल्शियम (Ca) और पोटेशियम (K) जैसे मिट्टी से प्राप्त किया जाता है। अन्य तत्व के रूप में खनिज जैसे नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), सोडियम (Na) और अमीनो एसिड जैसे तत्व अन्य पौधों से प्राप्त किया जाता है |

इसके लिए निम्न उपाय किये जा सकते है –

एग्रोफोरेस्ट्री सिस्टम, रूट शूट पुनर्जनन

प्राकृतिक रूप से चन्दन (Santalum album L) को धीमी गति से बढ़ने वाला लेकिन सदाबहार वृक्ष माना जाता है, चंदन अर्ध-परजीवी पौधे के रूप में जाना जाता है | पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए “हौस्टोरिया” के माध्यम से मेजबान पौधों के साथ सम्बन्ध बनाता है नाइट्रोजन (N),फास्फोरस (पी) और अमीनो एसिड मेजबान पौधों से प्राप्त होते हैं | जबकि कैल्शियम (Ca) और पोटेशियम (K) मिट्टी से लिया जाता है | अतः यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है की चन्दन की खेती के लिए एक होस्ट पौधे की आवश्यकता होती है जो इसके विकास और बढ़वार के उपयोगी होता है |

चन्दन की खेती करने का तरीका

चन्दन की खेती, उसका पेड़
चन्दन का पेड़

चन्दन एक परजीवी पेड़ है इसके लिए सबसे पहले इसके साथी वाले पौधे का चुनाव करना आवश्यक होता है शुरुवात में चन्दन के साथ आप सब्जी जैसे मिर्च, बैंगन, टमाटर या केले के साथ इसका पौधरोपण कर सकते है यह चन्दन की वृद्धि एवं विकास के लिए बहुत ही अच्छा योगदान देते है |

इसके साथ ही आप मध्य अवधि में जब चन्दन का विकास हो जाता है तो उसके साथ साथी पौधे अरहर को लगा सकते है पौधे की देखभाल करें जिससे चन्दन में संतुलित मात्रा में पोषक तत्व मिलते रहें |

और लम्बी अवधी के लिए चन्दन के साथी पौधे जैसे अनानास का प्रयोग कर सकते है

चन्दन की खेती के लिए पौधरोपण करने का तरीका

चन्दन की बीज प्राप्त करने के लिए आप बैंगलोर के कृषि संस्थान में संपर्क कर सकते है

  • सबसे पहले मिटटी में 30 सेमी. का गड्ढा खोद ले |
  • उसके बाद गड्ढे में चन्दन का पौधरोपण करने से पहले गोबर की सड़ी हुई खाद डालें |
  • साथी पौधे जैसे मिर्च, टमाटर, या केला का भी पौधरोपण करें |
  • चन्दन लगते समय पोलीबैग को हटा लेना चाहिए ताकि जड़े मिटटी में अच्छे से जुड़ जाये और जड़ को उर्जा मिलती रहे |

गर्मी से बचने के लिए शेड बनाना चाहिए जो चन्दन के साथी के साथ रहता है ऐसा इस लिए किया जाता है क्युकी इससे चन्दन चंदन की खेती के लिए वातावरण के अनुकूल हो जाये और इसकी वृद्धि अच्छी तरह से हो सके |

चन्दन की खेती में सिंचाई एवं संरक्षण

  • चन्दन को ज्यादा पानी की जरुरत नही होती है फिर भी 2-3 दिन के अन्तराल पर सिंचाई की जनि चाहिए जब वह पौधे के रूप में हो |
  • यह आग के प्रति बहुत ही संवेदनशील होती है अतः यह ध्यान रखना चाहिए की इसके आस पास कोई आग न जलाएं |
  • घास चरने वाले पशु जैसे गाय, भैंस, बकरी या भेड़ इसके आस पास न चरे |

चन्दन की खेती में रोग एवं रोकथाम

चन्दन की लकड़ी
चन्दन के टुकड़े

किट के प्रकोप से चन्दन को नुकसान होता है जिसके लिए किट नियंत्रण करना अति आवश्यक है, जब चन्दन में किट का आक्रमण होता है तो यह गंभीर और गंजा हो जाता है जिसके लिए जितनी जल्दी हो सके किटो को नष्ट किया जाना चाहिए |

  • पत्ते की इल्ली : आमतौर पर यह शुष्क मौसम में हमला करके पत्तीओं को नुकसान पहुंचाता है जिसको कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए |
  • फ़्ली किट : यह पत्तीओं पर गांठ बनता है तथा जड़ो को सड़ा देता है इसका नियंत्रण छटाई तथा कार्बेनिल और क्लोरफीरीफस का छिड़काव करके किया जा सकता है |
  • सूती मशरूम : यह टहनियों और पत्तियो को हमला करता है इसका नियंत्रण प्रभावित भाग को धोने से या डिटर्जेंट तथा पानी के साथ इसका छिड़काव के साथ कर सकते है |
  • स्टेम ब्लाईट : यह जड़ को सड़ा देता है तथा इसका नियंत्रण फंगिसाइड के छिड़काव से कर सकते है

होस्ट पौधे को हमेशा चन्दन के साथ उगाना चाहिए

चन्दन के खेती के लिए निम्न विधियो का प्रयोग करें

  • वाष्पीकरण को कम करें – ग्राउंड cover जैसे वनस्पति, कूड़े और पेड़ छतरी की उपस्तिथि पानी के वाष्पीकरण की दर को कम कर देता है |
  • माइक्रोक्लाइमेट की स्थिरता बनाये रखके – चन्दन के बीच जो फसलें उगाई गयी है वह इसकी स्थिरता बनाये रखती है |
  • चन्दन पर छाया प्रदान करें – विकसित चन्दन को छाया की जरुरत रहती है ज्यादा सूर्य का प्रकाश पड़ने से इसके विकास में बाधा उत्पन्न हो जाती है |
  • चन्दन के लिए परजिविकरण प्रक्रिया में सहायता करें – इंटरकॉर्प्स पेड़ो में आमतौर नरम जड़े होती है जो चन्दन की जड़ो को पर्याप्त मात्रा में संतुलित तत्व देने में सहायता करती है |
  • कीटों एवं रोगों के प्रसार को कम करके – चन्दन के पौधे आमतौर में इल्लियो के प्रति अति संवेदनशील होती है, रोपण के साथ बाड़ लगाकर बाड़ और मेजबान पौधे कीट-पकड़ने वाले के रूप में कार्य कर सकते हैं |
  • पौध की बाड़ – जब तक चन्दन के पेड़ का विकास न हुआ हो फल देने वाले पौधों को आस पास बाड़ा की तरह उपयोग में लाया जा सकता है |
चन्दन की खेती से kamai
चन्दन की खेती से कमाई

निष्कर्ष

चन्दन पौधों को बढ़ने और फलने-फूलने के लिए, पोषण की जरुरत होती है जो मेजबान पौधे से प्राप्त करता है, एक स्तर पर चन्दन के पौधों को धुप से बचने के लिए छाया की भी आवश्यकता होती है मेजबान पौधों के प्रकारों को जानकर नर्सरी और खेत में रोपण दोनों ही प्रकार से चन्दन की खेती करने का अच्छा भविष्य हो सकता है चन्दन की खेती के लिए प्राथमिक, माध्यमिक एवं तृतीयक तीनो स्तर के मेजबान पौधों को लगाना पड़ता है पार्श्व जड़ की कलिओं का पुनर्जनन करके चन्दन की खेती करने का एक वैकल्पिक साधन है |

चन्दन की खेती का विडियो

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